35-37 साल की नौकरी, फिर भी नर्सेज को सिर्फ एक पदोन्नति
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समयबद्ध डीपीसी नहीं होने से वरिष्ठ नर्सिंग ऑफिसर्स सेवानिवृत्त, रिक्त पदों पर कार्यवाहक नर्सिंग अधीक्षक लगाने की मांग
उदयपुर, 27 अक्टूबर: चिकित्सा विभाग में नर्सिंग कर्मचारियों की पदोन्नति व्यवस्था सवालों के घेरे में है। स्थिति यह है कि 35 से 37 साल तक सेवा देने के बावजूद अधिकांश नर्सिंग कर्मचारी नर्सिंग ऑफिसर से सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर केवल एक पदोन्नति लेकर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) नहीं होने से वरिष्ठ कर्मचारियों को उच्च पदों पर काम करने और पदोन्नति का लाभ पाने के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन, उदयपुर ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए समयबद्ध डीपीसी और रिक्त पदों पर कार्यवाहक नर्सिंग अधीक्षक नियुक्त करने की मांग उठाई है।
डीपीसी में देरी से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे कर्मचारी
डीपीसी की प्रक्रिया लंबी खिंचने से जब पदोन्नति सूची जारी होती है, तब तक कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके होते हैं। वहीं, ऑनलाइन एसीआर समय पर जमा नहीं होने के कारण कई कर्मचारियों के मामले स्थगित हो जाते हैं। लंबे इंतजार के बाद भी सीमित कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने से असंतोष बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि संबंधित चिकित्सालयों में नर्सिंग अधीक्षक के पद रिक्त हैं, लेकिन इन पर नियुक्ति की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हो रही है।
कोरोना काल में सेवाएं देने वालों की अनदेखी क्यों?
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के उदयपुर जिलाध्यक्ष पवन कुमार दानाध्यक्ष ने कहा, “चिकित्सा विभाग की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंग कर्मचारियों के साथ वर्षों से अन्याय हो रहा है। कोरोना काल और गंभीर रोगियों की देखभाल में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने वाले नर्सेज को पूरे सेवाकाल में केवल एक पदोन्नति मिलना बेहद अफसोसजनक है। प्रदेश स्तर पर कई बार ज्ञापन देने के बावजूद इस समस्या पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।” दानाध्यक्ष ने कहा कि सरकार और चिकित्सा विभाग को नर्सिंग कर्मचारियों की पदोन्नति की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि डीपीसी नियमित और समयबद्ध तरीके से कराई जाए तथा रिक्त पदों पर वरीयता के अनुसार कार्यवाहक नर्सिंग अधीक्षक नियुक्त कर कर्मचारियों को राहत दी जाए।

