देवस्थान विभाग की अनदेखी से ऐतिहासिक धरोहर की छत गिरने की कगार पर, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर संकट
उदयपुर। 3 अगस्त
प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ऋषभदेव में स्थित भगवान ऋषभदेव की 700 वर्ष पुरानी विश्रामस्थली पगलिया जी अब क्षरण और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। देवस्थान विभाग के अधीन आने वाली यह ऐतिहासिक स्थल न केवल श्रद्धा का केंद्र है बल्कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2013 से ही इस धरोहर की छत धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होनी शुरू हो गई थी। बरसात में पानी रिसने से छत और उसके नीचे स्थित लगभग 700 साल पुराना पेड़ भी अब टूटने की कगार पर है। यह छत किसी भी समय गिर सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
विश्रामस्थली तक पहुंचने वाला गलियारा भी हर बारिश में पानी से भर जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन करना मुश्किल हो जाता है। बारिश का पानी मंदिर के भीतर तक पहुंचता है, जिससे भीतर की संरचना को भी नुकसान हो रहा है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। सहायक आयुक्त का स्थायी पद होते हुए भी स्थल की गंभीर स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
भामाशाहों ने जताई थी मरम्मत की इच्छा, विभाग ने किया अनदेखा
सूत्रों के अनुसार देशभर से आए कई भामाशाहों ने इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए सहयोग की पेशकश की थी, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अब यह स्थल ध्वस्त होने के कगार पर है।
तैयार किया है तखमीना,
सहायक आयुक्त दीपिका मेघवाल ने कहा कि, “मुख्यालय से एईएन व निर्माण से जुड़े अधिकारियों को बुलाकर तखमीना तैयार किया जाएगा। इच्छुक भामाशाहों से संपर्क कर मरम्मत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।” जबकि स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि समय रहते यदि आवश्यक मरम्मत नहीं की गई तो यह ऐतिहासिक स्थल एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है। श्रद्धालुओं और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।