अब प्रमुख अधिकारी के इसी महीने सेवानिवृत्त होने पर मंडराया अस्तित्व का संकट
सुभाष शर्मा
उदयपुर: 10 अगस्त
उदयपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से गठित सीएमएचओ-2 कार्यालय तीन साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। राज्य सरकार ने वित्त विभाग से संशोधित स्वीकृति के तहत इसके संचालन के लिए 113 पदों को मंजूरी दी थी, जिनमें 52 पदों पर सीधी भर्ती और 61 पद सीएमएचओ-1 से ट्रांसफर होने थे। लेकिन हकीकत यह है कि न तो नई भर्ती हुई और न ही ट्रांसफर पूरे हुए। महज कुछ कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्यभार के तहत इधर लगाया गया, वह भी सीमित समय के लिए।
कार्यालय के लिए स्वीकृत पदों में 6 कंप्यूटर फीड मैन, 6 वाहन चालक, 6 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 6 परिचारक, 6 महिला स्वास्थ्यकर्मी, 6 पुरुष स्वास्थ्यकर्मी और अन्य तकनीकी पद शामिल थे। शेष 61 पदों पर चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, एएनएम आदि की तैनाती होनी थी। मगर अस्थायी रूप से कुछेक स्टाफ के अलावा शेष पद खाली रह गए।
दायित्व भी कभी नहीं मिला
कार्यालय को उदयपुर जिले के 15 में से 7 ब्लॉकों—मावली, गोगुंदा, झाड़ोल, कोटड़ा, फलासिया, गिर्वा और खेरवाड़ा—में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन सौंपना तय था। लेकिन तीन साल में यह जिम्मेदारी कभी सौंपी ही नहीं गई। नतीजतन सीएमएचओ-2 महज नाममात्र का कार्यालय बनकर रह गया, जबकि शेष 8 ब्लॉकों का संचालन पहले की तरह सीएमएचओ-1 कार्यालय ही करता रहा। कार्यालय संचालन के लिए फर्नीचर की खरीदारी का प्रस्ताव भी ट्रेजरी को भेजा गया किन्तु ट्रेजरी खाते में बजट न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। यहां तक चौपहिया वाहन का इंतजाम अस्थायी रूप से सीएमएचओ—1 की ओर से किया गया था।
अब पद खत्म होने का डर
अगस्त में सीएमएचओ-2 पर सेवारत अधिकारी डॉ. गुलाम मोहयुद्दीन सैयद की सेवानिवृत्ति होने वाली है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बिना दायित्व और स्टाफ वाले इस पद व कार्यालय को सरकार खत्म भी कर सकती है। यह स्थिति उस मंशा के विपरीत है जिसके तहत जिले में स्वास्थ्य प्रबंधन को दो हिस्सों में बांटकर जिम्मेदारियां तय करने की योजना बनाई गई थी। इस मामले में डॉ. गुलाम मोहयुद्दीन सैयद का कहना है कि सरकारी योजनाओं की क्रियान्विति में जितनी जिम्मेदारी मिली, उसे बखूबी निभाया। आगे क्या होगा, कुछ कह नहीं सकते।