अक्षय तृतीया पर 22 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में

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जांगिड समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन से दहेज व बाल विवाह के खिलाफ दिया जागरूकता संदेश
प्रतापगढ़, 19 अप्रैल
: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रतापगढ़ में जांगिड समाज का 25वां आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन रजत जयंती वर्ष के रूप में उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में 22 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन, परिजन और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देकर उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें नवदंपतियों के उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की गई। आयोजन में सादगी, संस्कार और भारतीय परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया, जिससे सामाजिक समरसता और एकजुटता का संदेश मिला।
सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल वैवाहिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज सुधार का सशक्त माध्यम भी बना। इस मंच से दहेज प्रथा, बाल विवाह, विवाह समारोहों में फिजूलखर्ची तथा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया। समाज के वरिष्ठजनों ने उपस्थित लोगों से इन कुरीतियों से दूर रहने और सरल विवाह को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रकार के सामूहिक विवाह सम्मेलन सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भी सहारा साबित होते हैं। कम खर्च में सम्मानपूर्वक विवाह संपन्न होने से जरूरतमंद परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है।
रजत जयंती वर्ष में आयोजित यह सम्मेलन सामाजिक सरोकार और सामूहिक सहयोग की मिसाल बनकर उभरा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ विवाह जैसे संस्कार को सादगीपूर्वक संपन्न कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।