स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान

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पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित
उदयपुर, 26 जुलाई:
गुलाब बाग स्थित नवलखा महल में रविवार को पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य समाज भीलवाड़ा के प्रधान एवं श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने अपना वैभवशाली जीवन त्यागकर आर्य समाज की सेवा को समर्पित किया और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
विजय शर्मा ने बताया कि स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती, जिनका पूर्व नाम हनुमान प्रसाद चौधरी था, खनन व्यवसाय से जुड़े थे। बाद में उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती के विचारों से प्रभावित होकर संन्यास ग्रहण किया तथा श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नवलखा महल के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये का दान देकर इसे नया स्वरूप दिलाने में अहम योगदान दिया।
इस अवसर पर स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती ने “वैदिक राष्ट्रवाद : एक विमर्श” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने स्वराज और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया, जिसका स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा। स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती ने कहा कि नवलखा महल आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है, जिसका प्रमुख श्रेय स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती के प्रयासों को जाता है।
राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती को राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा का प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। न्यास अध्यक्ष अशोक आर्य ने कहा कि स्वामी जी का सपना नवलखा महल को वैश्विक पहचान दिलाना था, जिसे साकार करने के लिए न्यास निरंतर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक यज्ञ से हुआ तथा अंत में शांतिपाठ के साथ समारोह का समापन हुआ। इसमें आर्य समाज एवं न्यास के पदाधिकारी, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।