गीत, भजन और प्रेरक प्रसंगों से सजा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों का स्नेह मिलन

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129वें द्विमासिक समारोह में स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन का दिया संदेश
उदयपुर, 8 जून:
सेवानिवृत्त वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों का 129वां द्विमासिक स्नेह मिलन समारोह रविवार को एमपीयूएटी गेस्ट हाउस में डॉ. एल.एस. जैन की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। समारोह में भजन, कविता, संगीत, प्रेरक प्रसंगों और सम्मान कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मीयता एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विमल शर्मा की “ईश वंदना” से हुआ। इसके बाद डॉ. के.एल. डांगी, श्रीमती मणि पटेल एवं आर. स्वामीनाथन ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जबकि डॉ. के.एल. तोतावत ने अपने “प्राणवान दोहों” से सभी को प्रभावित किया।
श्रीमती शकुन्तला धाकड़ एवं डॉ. एल.एल. धाकड़ ने प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से बताया कि तृष्णा मानसिक अशांति का प्रमुख कारण है तथा जीवन के उत्तरार्ध में परिवार को मांगने पर ही सलाह देना सुख और सौहार्द का आधार बनता है।
श्रीमती शशिकांता कंठालिया ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती “वृक्ष की व्यथा” कविता सुनाई, जबकि डॉ. पी.सी. कंठालिया ने चुटकुलों से सभी को गुदगुदाया। आर. स्वामीनाथन ने विभिन्न कलाकारों की शैली में संगीतमय फिल्मी मेडली प्रस्तुत की। डॉ. के.एल. डांगी और डॉ. विमल शर्मा की प्रस्तुतियों ने भी खूब सराहना बटोरी।
समारोह में इस माह जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ मनाने वाले सदस्यों का डॉ. ए.एल. तापड़िया के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तिलक एवं माला पहनाकर सम्मान किया गया। अंत में डॉ. पी.सी. कंठालिया परिवार की ओर से स्नेहभोज आयोजित किया गया तथा आभार डॉ. एस.सी. भारद्वाज ने व्यक्त किया।
‘तृष्णा छोड़ें, सुख अपनाएं’ का संदेश
स्नेह मिलन समारोह में वक्ताओं ने जीवन में संतोष, संयम और सकारात्मक सोच के महत्व पर जोर दिया। प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से बताया गया कि अनावश्यक इच्छाएं मानसिक तनाव बढ़ाती हैं, जबकि संतोष और सीमित अपेक्षाएं जीवन में शांति और खुशहाली लाती हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उम्र के साथ जीवन को सरल और सहज बनाना ही सच्चे सुख का मार्ग है।