उदयपुर। कुछ तस्वीरें कैमरे में कैद होती हैं, तो कुछ दिल की गहराइयों में हमेशा के लिए उतर जाती हैं।
झीलों की नगरी के ऐतिहासिक गणगौर घाट पर हर रोज कुछ ऐसी ही खूबसूरत कहानियां जन्म लेती हैं। यहां हथेलियों पर बिखरे चंद दानों के बहाने इंसान और परिंदों के बीच विश्वास का अनकहा रिश्ता खिल उठता है।
कभी किसी सैलानी की हथेली पर बेखौफ उतरता कबूतर, तो कभी पंखों की फड़फड़ाहट के बीच चेहरे पर तैरती मासूम मुस्कान… ये लम्हे मानो जिंदगी की भागदौड़ से चुराए हुए सुकून के अनमोल मोती हैं।
देशी-विदेशी सैलानी यहां सिर्फ कबूतरों को दाना नहीं खिलाते, बल्कि प्रकृति से आत्मीय संवाद का सुख भी बटोरते हैं।
कैमरे में सिमटते ये दिलकश नजारे उदयपुर की ऐसी सौगात बन जाते हैं, जो तस्वीरों से निकलकर उम्रभर यादों में महकती रहती है।
फोटो: राकेश शर्मा ‘राजदीप’