इस बार हाथी पर सवार आएंगी मां दुर्गा, घोड़े पर होगा विदाई का मान्यता-आधारित संकेत; नवरात्र में विशेष संयोग
उदयपुर, 2 अक्टूबर: शक्ति की आराधना के पर्व शारदीय नवरात्र को लेकर उदयपुर में श्रद्धालुओं में उत्साह है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होगी। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, आरती और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचेंगे।
हाथी पर आगमन, घोड़े पर विदाई
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार मां भगवती का आगमन हाथी पर माना गया है। डॉ. पं. जितेंद्र त्रिवेदी के अनुसार धार्मिक परंपराओं में हाथी को सुख, समृद्धि, स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण देवी का हाथी पर आगमन श्रद्धालुओं के लिए शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।
वहीं नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा की विदाई घोड़े पर होने की मान्यता है। आचार्य मदनमोहन के अनुसार धार्मिक परंपराओं में देवी के घोड़े पर प्रस्थान को विशेष संकेत से जोड़ा गया है। कुछ मान्यताओं में इसे युद्ध, संघर्ष अथवा अशांति जैसी परिस्थितियों का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इसे भविष्य में होने वाली किसी निश्चित घटना की भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग परंपराओं में इन मान्यताओं की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जाती है।
नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों की आराधना
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ साधना, जप और व्रत का दौर चलेगा। श्रद्धालु मां भगवती से परिवार में सुख-शांति, सुख-समृद्धि तथा समाज और देश के मंगल की कामना करेंगे।