स्वच्छता से गढ़ी पहचान ही स्थायी: के.के. गुप्ता

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धौलपुर, 9 अप्रैल: स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान सरकार के अंतर्गत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के प्रदेश ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने गुरुवार को धौलपुर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि पद और प्रतिष्ठा सीमित समय तक साथ देते हैं, लेकिन स्वच्छता और जनकल्याण के कार्यों से बनी पहचान युगों तक जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि भले ही पांच वर्ष के लिए चुने जाते हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए नवाचार और विकास कार्य उन्हें स्थायी पहचान दिलाते हैं
गुप्ता ने स्वच्छ भारत मिशन को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि 145 करोड़ देशवासियों से जुड़ा जनआंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप शुरू हुआ यह अभियान आज देशभर में व्यापक बदलाव ला रहा है और स्वच्छता के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आई है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ कार्य करना होगा।
प्रदेश की सभी 309 नगर निकायों का एबीसीडी ग्रेडिंग के आधार पर होगा मूल्यांकन
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 309 नगर निकायों का एबीसीडी ग्रेडिंग के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वच्छ राजस्थान का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। साथ ही उन्होंने राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में निवेश और विकास की गति तेज हुई है, जिसमें स्वच्छता की अहम भूमिका है। बैठक में जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी ने डूंगरपुर के स्वच्छता मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है और अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत है।
स्वच्छता के पांच प्रमुख घटकों पर विशेष जोर
कार्यशाला में स्वच्छता के पांच प्रमुख घटकों पर विशेष जोर दिया गया। इसमें घर-घर कचरा संग्रहण को सुबह 10 बजे से पहले सुनिश्चित करना, गीले और सूखे कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना, सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई और प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर सख्ती शामिल है। साथ ही शहरों में खाली प्लॉट्स को कचरा मुक्त रखने, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त करने, पार्कों की साफ-सफाई, अवैध गतिविधियों पर रोक और कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए। गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनसहभागिता से ही इसे स्थायी बनाया जा सकता है।