प्रतिदिन एक से सोलह माला हरिनाम जप करने का लिया संकल्प, कीर्तन, गुरु पूजा एवं महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ उत्सव*
उदयपुर। भूपालपुरा स्थित हरे कृष्ण मंदिर, उदयपुर में श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में आश्रय उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं भक्तों ने भाग लिया और अपने आध्यात्मिक जीवन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हरे कृष्ण मूवमेंट के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद के चरणों में आश्रय ग्रहण किया। इस अवसर पर अनेक भक्तों ने प्रतिदिन हरे कृष्ण महामंत्र का निश्चित संख्या में जप करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में जयपुर से पधारे श्रीमान रघुपति प्रभुजी की उपस्थिति में आश्रय उत्सव संपन्न हुआ। रघुपति प्रभुजी राजस्थान में अक्षय पात्र के संचालन प्रमुख होने के साथ-साथ हरे कृष्ण मूवमेंट उदयपुर के प्रमुख भी हैं। इसके अतिरिक्त वे जयपुर स्थित हिंगोलिया गौशाला तथा डीग, भरतपुर स्थित सेवल मंदिर के प्रमुख का दायित्व भी निभा रहे हैं।
उन्होंने अपने उद्बोधन में भक्तों को नियमित हरिनाम जप करने तथा आध्यात्मिक जीवन में अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
हरिनाम जप का संकल्प है आश्रय उत्सव का मुख्य उद्देश्य
आश्रय उत्सव का उद्देश्य भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में नियमित रूप से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। वैष्णव परंपरा में आश्रय ग्रहण करना आध्यात्मिक जीवन की एक महत्वपूर्ण अवस्था है, जिसमें भक्त श्रील प्रभुपाद के चरणों में आश्रय लेकर प्रतिदिन निश्चित संख्या में हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने का संकल्प लेते हैं।
इस उत्सव के दौरान भक्तों ने अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार प्रतिदिन एक, दो, चार, आठ, बारह और सोलह माला हरिनाम जप करने का संकल्प लिया। इस प्रकार भक्तों ने अपने दैनिक जीवन में भगवान के पवित्र नाम का नियमित स्मरण करने तथा भक्ति मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का प्रण किया।
हरे कृष्ण महामंत्र— हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे—का नियमित जप वैष्णव भक्ति परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त इस साधना के माध्यम से अपने आध्यात्मिक जीवन को सुदृढ़ करने और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्ति को गहरा करने का प्रयास करते हैं।
कीर्तन, गुरु पूजा एवं महाप्रसाद के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम में रघुपति प्रभुजी के प्रेरणादायी उद्बोधन के पश्चात भक्तिमय कीर्तन, गुरु पूजा एवं आरती का आयोजन किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा। अंत में सभी उपस्थित भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया और उत्सव का समापन हुआ।
हरे कृष्ण मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस उत्सव के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। हर वर्ष अधिक संख्या में भक्त आश्रय ग्रहण कर नियमित हरिनाम जप का संकल्प ले रहे हैं। यह आयोजन भक्तों को आध्यात्मिक जीवन में अनुशासन, श्रद्धा और निरंतरता अपनाने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में भक्ति एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रसार का माध्यम बन रहा है।