तीसरा नेत्र जगाने से मिटते हैं मन के विकार

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शिव कथा में प्रशांत अग्रवाल ने सुनाया कामदेव वध का प्रसंग
उदयपुर, 22 अगस्त:
नारायण सेवा संस्थान में चल रही ‘अपनों से अपनी बात भोलेनाथ के साथ’ शिव कथा में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने शिव महिमा का वर्णन किया।
उन्होंने हिमवान-मैना की तपस्या, पार्वती जन्म, नारद संवाद, पार्वती की तपस्या और कामदेव वध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान और विवेक का प्रतीक है। कामदेव असंयम, लालसा और विकारों के प्रतीक हैं। जब मनुष्य अपने भीतर ज्ञान और विवेक का तीसरा नेत्र खोलता है तो वह मोह और विकारों पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को संयम और विवेक से दिशा देना ही जीवन की सच्ची साधना है। कथा के दौरान श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयघोष से भावविभोर रहे।