कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को दी वैज्ञानिक खेती और उर्वरक प्रबंधन की जानकारी
उदयपुर, 21 अप्रैल: कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए गए। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ने पर चिंता जताई।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी ने कहा कि यूरिया और डीएपी का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उत्पादन क्षमता घटा रहा है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग अपनाने और जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट तथा प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की सलाह दी।
आत्मा परियोजना के सहायक निदेशक डॉ. हरीश टांक ने कृषि विभाग की योजनाओं और अनुदानों की जानकारी देते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग को जरूरी बताया। वहीं इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक मुकेश आमेटा ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग की विधियां समझाईं।
कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैविक खाद निर्माण और फसल चक्र अपनाने के फायदे बताए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान लागत घटाने के साथ उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं।