800 साल पुरानी आस्था, लकड़ी का एक टुकड़ा भी ले जाना माना जाता है वर्जित
बांसवाड़ा, 2 अप्रैल: जिले के मूंगाणा गांव स्थित प्राचीन सांगोली हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और गहरी आस्था के कारण विशेष पहचान रखता है। करीब 800 वर्ष पुराने इस मंदिर में विराजित हनुमानजी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। हनुमान जन्मोत्सव पर यहां विशेष श्रृंगार, सुंदरकांड पाठ और धार्मिक आयोजन किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इस मंदिर की सबसे खास मान्यता यह है कि यहां आसपास के सागवान के पेड़ों की रखवाली स्वयं हनुमानजी करते हैं। मंदिर परिसर के चारों ओर करीब 25 बीघा जमीन में घने पेड़ हैं, जिनसे लकड़ी का एक टुकड़ा भी कोई नहीं ले जा सकता। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसा करने पर अनिष्ट होने की मान्यता है।
करीब 11 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय समाज के साथ विदेश में कार्यरत युवाओं का भी योगदान मिल रहा है।
हर मंगलवार और शनिवार को यहां मेला लगता है, जहां हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और आस्था प्रकट करते हैं।