सूक्ष्म कलाकृतियों और लघु पुस्तिकाओं के लिए देशभर में पहचान, धर्म-संस्कृति से लेकर इतिहास और समसामयिक विषयों तक को दिया आकार
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 4 सितंबर: उदयपुर के डॉ. चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा ने ऐसी कला को अपना जुनून बनाया है, जिसमें आकार छोटा होता है, लेकिन कल्पना और मेहनत का संसार बेहद बड़ा। सूक्ष्म कलाकृतियों और माइक्रो बुक्स के लिए पहचान बना चुके चित्तौड़ा कागज, चॉक स्टिक, चावल के दाने, माचिस की तीलियों और अन्य माध्यमों पर बारीक कारीगरी करते हैं। उनकी रचनाओं में धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों के साथ महापुरुषों का जीवन, इतिहास, पर्यावरण, सामाजिक सरोकार और समसामयिक विषय भी दिखाई देते हैं।
कलाकृति के साथ इतिहास भी सुरक्षित
चित्तौड़ा की खासियत केवल छोटी आकृतियां बनाना नहीं, बल्कि किसी विषय की जानकारी को लघु पुस्तिका में संरक्षित करना है। उन्होंने महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, सगसजी बावजी, महावीर स्वामी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले जैसे व्यक्तित्वों पर सूक्ष्म पुस्तिकाएं तैयार की हैं। महावीर जयंती पर बनाई कृति में भगवान महावीर के जन्म से निर्वाण तक के प्रसंग, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे सिद्धांतों को शामिल किया गया।
राजस्थान को भी समेटा सूक्ष्म पुस्तक में
मार्च 2026 में उन्होंने राजस्थान के मानचित्र के आकार वाली पुस्तक तैयार की। इसमें प्रदेश की सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ जिलों की पहचान तथा राजस्थान के भौगोलिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों को दर्शाया गया।
रिकॉर्ड और सम्मान भी मिले
चित्तौड़ा के माइक्रो बाइंडिंग बुक्स के संग्रह को ग्रेट विनर वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। 2021 में उनकी सूक्ष्म पुस्तकों के संग्रह के लिए ग्रेट इंडियन बुक्स ऑफ रिकॉर्ड से भी सम्मान मिलने का उल्लेख है। उनकी एक विशेष उपलब्धि एक इंच की सूक्ष्म डायरी से भी जुड़ी है, जिसे विश्व की सबसे छोटी डायरी के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
पर्यावरण से लेकर जागरूकता तक
विश्व साइकिल दिवस पर उन्होंने डायरी की कटिंग से साइकिल के आकार की 20 पृष्ठों वाली सूक्ष्म पुस्तिका बनाई, जिसमें साइकिल के इतिहास और विकास यात्रा को समेटा। हरित कागज पर तैयार कृति के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
कला जो दस्तावेज भी है
चित्तौड़ा की सूक्ष्म कला को खास बनाने वाली बात यह है कि उनकी कृतियां केवल देखने भर की वस्तु नहीं रहतीं, बल्कि किसी विषय की स्मृति, इतिहास और संदेश को छोटे आकार में सुरक्षित करने का माध्यम बनती हैं। वर्षों से राष्ट्रीय पर्व, धार्मिक आयोजन, महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि और सामाजिक विषय उनकी रचनात्मकता के केंद्र में रहे हैं।