भक्ति और संयम से सराबोर हुआ शहर, 17 साल बाद साध्वी डॉ. विद्युत प्रभा का मंगल प्रवेश

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चातुर्मास को आए मुनिराज नव्य प्रसन्न कीर्तिसागर और दिव्य प्रसन्न कीर्तिसागर महाराज का भव्य स्वागत
उदयपुर, 19 जुलाई:
उदयपुर में रविवार को जैन समाज के दो प्रमुख चातुर्मास प्रवेश समारोह भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुए। दादाबाड़ी स्थित वासूपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट में 17 वर्ष बाद साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 का भव्य मंगल प्रवेश हुआ, वहीं हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित जैन तीर्थ परिसर में मुनिराज नव्यप्रसन्नकीर्तिसागर महाराज, महाशतावधानी मुनिराज दिव्यप्रसन्नकीर्तिसागर महाराज तथा श्रमण-श्रमणी वृंद का श्रद्धालुओं ने गगनभेदी जयकारों के साथ स्वागत किया। दोनों आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से धर्ममय वातावरण बना रहा।


साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी ने प्रथम प्रवचन में कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और संयम के माध्यम से आत्मकल्याण का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वाध्याय, तप, सामायिक, सेवा और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने 28 जुलाई से प्रारंभ होने वाले 29 दिवसीय माणिक्य स्वामी तप की भी जानकारी दी।
दूसरी ओर, जैन तीर्थ परिसर में आयोजित धर्मसभा में गुरु भगवंतों ने चातुर्मास को तप, त्याग, सेवा और आत्मशुद्धि का पर्व बताते हुए धर्म आराधना के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। दोनों स्थानों पर शोभायात्राएं, मंगल प्रवेश, गुरु वंदन, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, पर्युषण महापर्व सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।