राजस्थान के धार्मिक और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता : के.के. गुप्ता

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स्वच्छ पर्यटन से बढ़ेगी आस्था, रोजगार और प्रदेश की आय; मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जोर
नई दिल्ली/जयपुर/डूंगरपुर, 20 अप्रैल:
राजस्थान के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। स्वच्छ भारत मिशन शहर 2.0 के प्रदेश ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के सभी धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता सुनिश्चित की जाए, क्योंकि ये स्थल न केवल राजस्थान की पहचान हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और आस्था के प्रमुख केंद्र भी हैं।
गुप्ता ने कहा कि राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक दुर्गों, मंदिरों, झीलों और पर्यटन स्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। पुष्कर, खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, नाथद्वारा, अजमेर शरीफ जैसे धार्मिक स्थलों के साथ आमेर किला, जैसलमेर दुर्ग, चित्तौड़गढ़, माउंट आबू और रणथंभौर जैसे पर्यटन केंद्र हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में इन स्थानों की स्वच्छता प्रदेश की छवि और पर्यटन विकास दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
स्वच्छता से मजबूत होगी पर्यटन अर्थव्यवस्था
के.के. गुप्ता ने कहा कि पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। इससे होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, लोक कलाकारों और छोटे व्यापारियों को व्यापक रोजगार मिलता है। यदि पर्यटन स्थलों पर बेहतर सफाई व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और सुव्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए तो पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि ‘जीरो वेस्ट पॉलिसी’ जैसे प्रयास पर्यटन को नई गति दे सकते हैं और राज्य की आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी
उन्होंने कहा कि मंदिर और धार्मिक स्थल केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनी रहे। गुप्ता ने बताया कि कई स्थानों पर प्लास्टिक कचरा, अव्यवस्थित शौचालय और गंदगी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त कचरा पात्र, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र और जागरूकता बोर्ड अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। साथ ही स्थानीय निकायों, मंदिर ट्रस्टों और स्वयंसेवी संगठनों को संयुक्त रूप से स्वच्छता अभियान चलाना चाहिए।
जनभागीदारी से बनेगा स्वच्छ राजस्थान
के.के. गुप्ता ने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता जनता की भागीदारी पर निर्भर करती है। यदि श्रद्धालु और पर्यटक स्वयं स्वच्छता नियमों का पालन करें और कचरा इधर-उधर न फैलाएं तो राजस्थान देश का सबसे स्वच्छ पर्यटन राज्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति और अतिथि सत्कार में यदि स्वच्छता को भी प्रमुख स्थान दिया जाए, तो प्रदेश की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।