नारायण सेवा संस्थान में श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव के साथ मनाई गई निर्जला एकादशी
उदयपुर, 25 जून : नारायण सेवा संस्थान में निर्जला एकादशी पर्व श्रद्धा, आस्था और सेवा भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से निःशुल्क सर्जरी एवं कृत्रिम अंग लगवाने आए दिव्यांगजनों और उनके परिजनों के लिए फलाहार एवं विशेष भोजन की व्यवस्था की गई। साथ ही आध्यात्मिक संवाद और आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया।
संस्थान में आयोजित ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने निर्जला एकादशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपवास का वास्तविक अर्थ भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि भगवान के निकट रहना है। उन्होंने कहा कि ‘उप’ का अर्थ निकट और ‘वास’ का अर्थ निवास है, इसलिए उपवास आत्मा को परमात्मा के समीप ले जाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि निर्जला एकादशी केवल प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद लोभ, मोह, अहंकार और तृष्णा पर विजय पाने का अवसर भी है।
अग्रवाल ने कहा कि सच्चा व्रत वही है जो व्यक्ति के विचारों को शुद्ध कर सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने भक्त ध्रुव, द्रौपदी, शबरी, जटायु और सुदामा के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों के बाद ही उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त हुई।
इस अवसर पर संस्थापक कैलाश ‘मानव’ ने रोगियों को फल वितरित किए, जबकि निदेशक वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल ने महिलाओं को छाते, आम, जल कलश, वस्त्र और चप्पलों का वितरण किया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांगजनों ने अपने संघर्ष और संस्थान से मिले नए जीवन की प्रेरक कहानियां भी साझा कीं।