देवस्थान भूमि विवाद ने फिर पकड़ा तूल

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जाली दस्तावेजों से भू-परिवर्तन का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
सलूम्बर, 8 जून:
सलूम्बर नगर की ऐतिहासिक देवस्थान भूमि और मीठे पानी की बावड़ी को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मंदिर से जुड़े लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में गलत तथ्यों और कथित जाली दस्तावेजों के आधार पर कृषि भूमि का भू-परिवर्तन कर आबादी पट्टे जारी किए गए। समिति का दावा है कि यह भूमि वर्षों से ठाकुर श्री द्वारिकानाथ मंदिर की आय का स्रोत रही है और यहां स्थित बावड़ी धार्मिक तथा सार्वजनिक उपयोग का महत्वपूर्ण केंद्र थी।
मंदिर के पुजारी सुनील सेवक ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के चलते देवस्थान भूमि को निजी नामों में दर्ज करवा दिया गया। इससे मंदिर की संपत्ति और ऐतिहासिक धरोहर दोनों प्रभावित हुई हैं।
समिति ने सरकार से राजस्व रिकॉर्ड, भू-परिवर्तन प्रक्रिया और कथित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। साथ ही बावड़ी और देवस्थान भूमि को मूल स्वरूप में बहाल कर मंदिर प्रशासन को सौंपने की अपील की है।