समय के अनुरूप हो संवाद, लेकिन मूल्य और ध्येय रहें स्थिर: जे. नंदकुमार

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उदयपुर के शिक्षण संस्थानों में युवा संवाद, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर दिया जोर
उदयपुर, 20 अगस्त:
बदलती पीढ़ी के साथ संवाद का तरीका बदलना जरूरी है, लेकिन विचारों के मूल मूल्य और ध्येय स्थिर रहने चाहिए। जेन जी और जेन अल्फा डिजिटल तकनीक के साथ पली-बढ़ी पीढ़ियां हैं, इसलिए उनकी भाषा, सवाल और सामाजिक संवेदनाएं पिछली पीढ़ियों से अलग हैं। यह बात प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने उदयपुर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रमों में कही।
कॉलेज ऑफ कम्युनिटी एंड एप्लाइड साइंस में छात्राओं से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि किसी संगठन को नई पीढ़ी से जुड़ने के लिए अपनी भाषा समयानुकूल बनानी चाहिए, लेकिन मूल दृष्टि नहीं छोड़नी चाहिए। ध्येय स्थिर रखते हुए कार्यपद्धति को गतिशील बनाना जरूरी है।
सीटीएई में इंजीनियरिंग विद्यार्थियों से संवाद में उन्होंने भारत की गौरवशाली परंपरा, वैश्विक भूमिका और राष्ट्र निर्माण में युवाओं के योगदान पर चर्चा की। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, साहस, दृढ़निश्चय और निर्भीकता जैसे गुणों को जरूरी बताया।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज में रमेश शुक्ल ने युवाओं से भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझकर राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। अरावली इंस्टीट्यूट में डॉ. विनोद यादव ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी बताया।