हाई रिस्क गर्भवतियों की सतत निगरानी कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करें: सीएमएचओ

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उदयपुर, 20 जुलाई: जिले में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित संस्थागत प्रसव को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि पहली प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) से लेकर सुरक्षित प्रसव तक प्रत्येक गर्भवती महिला की स्वास्थ्य स्थिति, संभावित जटिलताओं और उपचार संबंधी जानकारी नियमित रूप से अपडेट रखना विभाग की जिम्मेदारी है। सभी हाई रिस्क गर्भवतियों की सतत ट्रैकिंग करते हुए समय पर रेफरल और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए।
डॉ. आदित्य ने निर्देश दिए कि सीएचओ और एएनएम अपने क्षेत्र की सभी एचआरपी महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें तथा आशा कार्यकर्ता प्रत्येक दूसरे दिन उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट संबंधित चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराएं। किसी भी प्रकार की जटिलता सामने आने पर तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने और 108 एम्बुलेंस सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में स्टेट नोडल अधिकारी मुकेश डिगरीवाल ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी स्वयं निभाए और सभी कार्य केवल आशा व एएनएम पर न छोड़े। उन्होंने बताया कि पिछले चार दिनों में उदयपुर जिले के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निरीक्षण के दौरान कई कमियां सामने आई हैं, जिन्हें तत्काल दूर करना आवश्यक है।
सीएमएचओ डॉ. ओमप्रकाश रायपुरिया ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी चिकित्सा संस्थानों में हाई रिस्क गर्भवतियों की नामवार सूची तैयार रखी जाए और सब-सेंटर से लेकर उच्च रेफरल संस्थान तक उनकी लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आरसीएचओ डॉ. राकेश गुप्ता ने सभी सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि अपने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क्षेत्र की सभी एचआरपी महिलाओं की अद्यतन सूची तैयार रखें, निकट प्रसव वाली महिलाओं की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें तथा एएनसी जांच, रेफरल, डिलीवरी प्लान, रक्त की उपलब्धता और 108 एम्बुलेंस की तैयारी की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने प्रत्येक गर्भवती और उसके परिवार की नियमित काउंसलिंग, समय पर संस्थागत प्रसव, फील्ड विजिट के दौरान एचआरपी मामलों के सत्यापन तथा सभी रिकॉर्ड अद्यतन रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला, ब्लॉक और राज्य स्तर से नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण किया जाएगा, इसलिए सभी अधिकारी नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि जिले की प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती महिला का सुरक्षित और समयबद्ध संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।