उदयपुर, 5 नवम्बर: डिजिटल क्रांति और कंप्यूटर की चकाचौंध के बीच भारतीय व्यापारिक परंपराओं की पहचान लाल रंग की खाते-बही आज भी अपनी गरिमा और धार्मिक आस्था संजोए हुए है।
बदलते समय में भले ही व्यापार का हिसाब-किताब कंप्यूटर और आधुनिक सॉफ्टवेयर में सिमट गया हो, लेकिन शुभ मुहूर्त में नई बही का पूजन और उसमें श्रीगणेश लिखने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत है।
तस्वीर में पारंपरिक लाल बहियों को तैयार करते कारीगरों के अनुभवी हाथ मानो विरासत के पन्नों पर विश्वास की इबारत लिख रहे हैं। बही के लाल आवरण में समृद्धि, शुभता और विश्वास का भाव समाया है। तकनीक ने भले ही हिसाब रखने का तरीका बदल दिया हो, लेकिन भारतीय व्यापार संस्कृति में बही का सम्मान आज भी अक्षुण्ण है। फोटो: राकेश शर्मा ‘राजदीप’