जलवायु परिवर्तन पर किसानों का प्रशिक्षण संपन्न

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माधव मेनारिया, वल्लभनगर, 23 मई : भींडर उपखंड क्षेत्र के गांव रायला में अपना संस्थान के भव्यधरा संदर्भ केंद्र रायला पर इडलगीव फाउंडेशन के तत्वाधान में जलवायु परिवर्तन पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत परिचय एवं स्वागत सत्र से हुई, जिसमें नारू लाल पदमेला एवं नवलराम रायला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का पंजीयन नारायण लाल नागलिया द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण की शुरुआत प्रतिभागी किसानों के परिचय से हुई, जिसमें किसानों ने अपने गांवों और कृषि कार्यों के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, खेती में नवाचार, मिश्रित खेती और नकदी फसलों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के चन्द्र प्रकाश चौबीसा ने पिछले प्रशिक्षण सत्रों की समीक्षा करते हुए जलवायु परिवर्तन के कारणों और उसके कृषि पर प्रभाव को प्रशिक्षण का मुख्य विषय बताया। इसके बाद दीपक शर्मा ने किसानों से खरीफ और रबी फसलों के बारे में चर्चा की तथा किसानों द्वारा बोई गई फसलों का चार्ट तैयार कराया। जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करते हुए मौसम में असामान्य बदलाव, अनियमित बारिश, बढ़ते तापमान और रात में लू चलने जैसी परिस्थितियों से खेती को भारी नुकसान हो रहा है। जिसके लिए मिश्रित खेती और फसल विविधीकरण पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के दूसरे चरण में कट्स संस्था से आये मदन गिरि ने जलवायु परिवर्तन के बीच आधुनिक खेती की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की ओर भी बढ़ना होगा। उन्होंने तीनों मौसम के लिए तैयार की गई सूरजमुखी और मूंगफली जैसी फसलों के प्रयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
मदन गिरि ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाशंकर शर्मा के प्रयासों से क्षेत्र के किसानों को सूरजमुखी के बीज उपलब्ध कराए गए।
कार्यक्रम की रिपोर्टिंग किशन अहीर द्वारा की। कार्यक्रम में कट्स संस्था की गायत्री जी ने कहा कि हमारी संस्था महिलाओं के साथ मिलकर कार्य कर रही है तथा F.P.O. के माध्यम से किसानों को आधुनिक उपकरणों और व्यापारिक खेती से जोड़ा जा रहा है।
किसान मोतीलाल ने बताया कि उन्होंने मक्का और उड़द की मिश्रित खेती कर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में माधव मेनारिया ने F.P.O. की कार्यप्रणाली और किसानों को मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। अंत में संस्थापक चन्द्र प्रकाश चौबीसा ने आगामी दिनों में जलवायु परिवर्तन और कृषि सुधारों को लेकर किसानों के साथ आगे भी बैठकें आयोजित करने की बात कही। तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन दीपक चौबीसा ने किया