सांसद डॉ. रावत की आपत्ति पर 9वीं से 12वीं तक की चार पुस्तकें हटाई

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उदयपुर, 16 अप्रैल: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की आपत्ति के बाद शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई जा रही चार पुस्तकों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से हटाने का निर्णय लिया है। विभाग ने आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन पुस्तकों का अध्ययन अब विद्यालयों में नहीं कराया जाए।
उपनिदेशक समाज शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर की ओर से जारी आदेश के अनुसार कक्षा 9 की ‘राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परंपरा’, कक्षा 10 की ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’, कक्षा 11 की ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत भाग-1’ और कक्षा 12 की ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत भाग-2’ को पाठ्यक्रम से विलोपित किया गया है। यह निर्णय हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों की पुस्तकों पर लागू होगा।
मामले की शुरुआत तब हुई जब सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कक्षा 9 की पुस्तक ‘राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परंपरा’ के अध्याय 4 में प्रकाशित कुछ ऐतिहासिक तथ्यों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में इतिहास संबंधी गलतियां हैं और कुछ अंश वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं। हालांकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने इन तथ्यों को सही बताते हुए संशोधन से इनकार कर दिया था। इसके बाद सांसद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि पुस्तकों में ‘बहुसांस्कृतिक राष्ट्र’ और ‘उपराष्ट्रीयताएं’ जैसे शब्द भारतीय राष्ट्रवादी भावना के विपरीत हैं।
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि संत गोविंद गुरु के स्वतंत्रता आंदोलन की तुलना झारखंड मुक्ति मोर्चा से करना ऐतिहासिक रूप से गलत है। लगातार उठी आपत्तियों के बाद शिक्षा विभाग ने चारों पुस्तकों को हटाने के आदेश जारी कर दिए।