चाक पर घूमने लगी उम्मीदें, माटी के दीयों में जगमगाने लगे खुशियों के सपने!

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उदयपुर, 12 अक्टूबर। अभी दीपावली की रोशनी बाजारों तक नहीं पहुंची, लेकिन लेकसिटी के कुंभकारों के आंगन में उम्मीदों के हजारों दीपक जगमगाने लगे हैं। कहीं चाक पर घूमती गीली माटी हुनर की शक्ल ले रही है, तो कहीं कारीगरों की अंगुलियों का जादू मिट्टी को खूबसूरत दीयों और घड़ों में ढाल रहा है। कुम्हारवाड़ा सहित आसपास की बस्तियों और उपनगरीय क्षेत्रों में इन दिनों सुबह से शाम तक चाक की रफ्तार के साथ दीपोत्सव की तैयारियां परवान चढ़ रही हैं।
खास बात यह है कि कभी चाइनीज झालरों और रेडीमेड सजावटी दीयों की चकाचौंध में फीकी पड़ती माटी की चमक अब फिर लौटने लगी है। ‘वोकल फॉर लोकल’ की बढ़ती भावना ने परंपरागत कुंभकारी को न केवल नया संबल दिया है, बल्कि कारीगरों की रोजी-रोटी में भी खुशियों के रंग घोल दिए हैं।
मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग से कुंभकार परिवारों की आमदनी और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है। सच तो यह है कि इन मेहनतकश हाथों में आकार लेता हर दीपक केवल किसी घर का अंधेरा ही दूर नहीं करेगा, बल्कि एक कारीगर परिवार की जिंदगी में भी खुशहाली की नई रोशनी बिखेरेगा।
फोटो : राकेश शर्मा ‘राजदीप’