वित्तीय संकट, पेंशन देनदारी और स्टाफ की कमी पर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने सरकार से मांगा जवाब
उदयपुर, 22 अगस्त: राजस्थान के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, पेंशन भुगतान और स्टाफ की कमी को लेकर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने राज्य सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महासंघ का कहना है कि जब विश्वविद्यालय अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियमित पेंशन और अन्य पेंशनरी लाभ समय पर देने की स्थिति में नहीं हैं तथा स्वीकृत पदों के बावजूद बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, तो ऐसे संस्थानों की वित्तीय स्थिरता और उच्च कृषि शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी और प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि पेंशन कर्मचारियों की वर्षों की सेवा से अर्जित देयता है। सरकार को विश्वविद्यालयों के लिए पर्याप्त बजट, आवश्यक मानव संसाधन और पेंशन देनदारियों के लिए स्थायी वित्तीय प्रावधान करना चाहिए।
पांचों विश्वविद्यालयों का वित्तीय हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
महासंघ ने सरकार से प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय की कुल पेंशन देनदारी, मासिक पेंशन आवश्यकता, लंबित सेवानिवृत्ति लाभ, सरकारी अनुदान, वेतन व्यय तथा स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि वित्तीय संकट को आंकड़ों के पीछे छिपाने के बजाय वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
ICAR Accreditation पर भी सवाल
महासंघ ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की मान्यता में वित्तीय संसाधन, मानव संसाधन, प्रशासन और संस्थागत क्षमता महत्वपूर्ण पहलू हैं। ऐसे में वित्तीय संकट और गंभीर स्टाफ कमी का असर अकादमिक गुणवत्ता और Accreditation पर पड़ सकता है। संगठन ने पांचों विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति और मैनपावर का स्वतंत्र आकलन कराने, लंबित पेंशनरी देनदारियों के लिए स्थायी बजट प्रावधान करने तथा आवश्यक पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की है। महासंघ का दो टूक सवाल है—जब पेंशन, पर्याप्त पैसा और स्टाफ नहीं है तो उच्च कृषि शिक्षा के राष्ट्रीय मानकों पर विश्वविद्यालय कैसे खरे उतरेंगे?