उदयपुर, 17 जुलाई: चिकित्सा विभाग से जुड़े बहुचर्चित रिश्वत प्रकरण में उदयपुर के विशिष्ट न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), संख्या-01 ने गिरफ्तार आरोपी एवं कथित दलाल अब्दुल कादिर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशिष्ट न्यायाधीश सतीश चन्द्र गोदारा (RJS) ने अपराध की गंभीरता, डिजिटल साक्ष्यों और जांच के प्रारंभिक चरण को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
विशिष्ठ लोक अभियोजक राजेश पारीक के अनुसार मॉर्डन मेडिको सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संचालक राजीव पोरवाल ने सोनोग्राफी लैब में नई महिला रेडियोलॉजिस्ट का नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि PCPNDT कार्यालय के संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल ने अपने कथित दलालों के माध्यम से ₹1.30 लाख रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के बाद ACB ने 9 जुलाई को मांग का सत्यापन किया और 10 जुलाई को ₹30 हजार की पहली किश्त लेते समय अब्दुल कादिर को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी डॉ. रतन बिलवाल मौके से फरार हो गए थे।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाए जाने का दावा किया, जबकि अभियोजन ने डिजिटल ट्रैप रिकॉर्डिंग, ट्रांसक्रिप्ट और बरामदगी का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
अदालत ने अपने आदेश में माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया आरोपी की मुख्य आरोपी के साथ कथित आपराधिक साजिश में भूमिका दर्शाते हैं। साथ ही, रिश्वत की राशि की बरामदगी और जांच के संवेदनशील प्रारंभिक चरण को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। इसके बाद न्यायालय ने अब्दुल कादिर की जमानत याचिका खारिज कर दी।