उदयपुर, 27 जून (सुभाष शर्मा): कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व की प्रस्तावित योजना केवल बाघों और वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव मेवाड़ के सैकड़ों गांवों और हजारों ग्रामीणों के जीवन पर पड़ेगा। प्रारंभिक प्रस्तावों के अनुसार रिजर्व के कोर क्षेत्र में आने वाले लगभग 24 गांवों का स्वैच्छिक पुनर्वास किया जा सकता है, जबकि बफर एवं परिधि क्षेत्र के 138 गांवों में नए नियम लागू होने के साथ विकास और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
24 गांवों का हो सकता है स्वैच्छिक पुनर्वास
टाइगर रिजर्व बनने पर कोर क्षेत्र में स्थित गांवों को चरणबद्ध तरीके से स्वैच्छिक पुनर्वास पैकेज के तहत स्थानांतरित किया जा सकता है। देश के अन्य टाइगर रिजर्वों की तर्ज पर प्रभावित परिवारों को भूमि, आवास, नकद मुआवजा, सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। हालांकि ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता अपनी पैतृक भूमि, वन संसाधनों और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को लेकर बनी हुई है।
वन एवं सामाजिक विषयों के जानकारों का मानना है कि पुनर्वास पूरी तरह स्वैच्छिक, पारदर्शी और ग्रामीणों की सहमति से होना चाहिए, अन्यथा भविष्य में सामाजिक विवाद और विरोध की स्थिति बन सकती है।
138 गांवों में बढ़ेंगे नियम, लेकिन मिलेंगे नए अवसर
बफर और परिधि क्षेत्र के लगभग 138 गांवों को विस्थापन का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन वन संरक्षण संबंधी नियम पहले की तुलना में अधिक सख्ती से लागू हो सकते हैं। नए खनन, बड़े उद्योगों और पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ेगा। वन क्षेत्र में चराई, लकड़ी संग्रहण और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए निर्धारित नियमों की कड़ाई से पालना कराई जा सकती है।
दूसरी ओर इन गांवों को इको-डेवलपमेंट योजनाओं का लाभ मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। ग्रामीणों के लिए होम-स्टे, पर्यटन गाइड, जंगल सफारी वाहन संचालन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों के विपणन और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
वन्यजीव पर्यटन से बढ़ेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
कुंभलगढ़ दुर्ग, रणकपुर और अरावली क्षेत्र पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन्यजीव पर्यटन जुड़ने से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
पर्यटन व्यवसायी मयंक पालीवाल का कहना है कि इससे होटल, रिसोर्ट, परिवहन, स्थानीय बाजार और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया बल
सेवानिवृत्त वन्यजीव अधिकारी योगेश शर्मा के अनुसार टाइगर रिजर्व बनने से वन संरक्षण के लिए अतिरिक्त केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। जल स्रोतों के विकास, अवैध शिकार पर नियंत्रण, जंगलों की निगरानी और वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्थाएं अधिक मजबूत होंगी। इससे अरावली क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता स्थानीय समुदायों के विश्वास पर निर्भर करेगी। यदि पुनर्वास, मुआवजा और आजीविका से जुड़े मुद्दों का संतोषजनक समाधान किया गया तो कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व मेवाड़ के पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना साबित हो सकता है।