मैं बोझ नहीं, भविष्य हूं’ और ‘जामुन का पेड़’ ने दिया सामाजिक जागरूकता का संदेश

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बाल रंग उत्सव के पहले दिन विद्यार्थियों ने नाटकों से समझे नारी शिक्षा, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के मायने
उदयपुर, 25 सितम्बर
: शिल्पग्राम का दर्पण सभागार शुक्रवार को बच्चों की रंगमंचीय प्रस्तुतियों और सामाजिक संदेशों से गूंज उठा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बाल रंग उत्सव के प्रथम दिन दो नाटकों का मंचन हुआ। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों का आनंद लेने के साथ सामाजिक सरोकारों और जीवन मूल्यों को समझा।
पहली प्रस्तुति ‘मैं बोझ नहीं, भविष्य हूं’ स्वांग शैली पर आधारित रही। लेखक डॉ. हिमांशु द्विवेदी और निर्देशक अश्विनी शर्मा के इस नाटक में बेटी बचाओ, नारी शिक्षा, समानता और नशामुक्ति जैसे विषयों को गीत, संगीत, हास्य-व्यंग्य और संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने बेटियों को बोझ समझने वाली सामाजिक सोच पर सवाल उठाते हुए शिक्षा और समानता का संदेश दिया।
इसके बाद कृष्ण चंदर की कहानी पर आधारित ‘जामुन का पेड़’ का मंचन हुआ। निर्देशक शिवेंद्र शुक्ला के निर्देशन में एल.एस. मेमोरियल स्कूल, छतरपुर के विद्यार्थियों ने सरकारी तंत्र की लालफीताशाही और फाइलों में उलझी व्यवस्था पर व्यंग्य किया। नाटक ने समयबद्धता, जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता का संदेश दिया। उत्सव में 26 सितंबर को ‘महारानी लक्ष्मीबाई’ तथा 27 सितंबर को ‘युगधारा’ और ‘अहिल्याबाई’ नाटकों का मंचन होगा।