एमएमआर 86 से बढ़कर 87 हुआ, उच्च जोखिम गर्भावस्था की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और प्रत्येक मातृ मृत्यु की गहन समीक्षा के निर्देश
उदयपुर, 12 जुलाई: राजस्थान में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 86 से बढ़कर 87 होने पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने चिंता व्यक्त की है। विभाग ने 16 जून 2026 को जारी परिपत्र में मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
परिपत्र के अनुसार सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं की समय पर पहचान, ट्रैकिंग और गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व देखभाल (एएनसी) सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। गंभीर जटिलताओं वाली गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध तरीके से उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
विभाग ने अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण एवं स्वच्छता पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत एसेप्टिक प्रक्रियाओं, ऑपरेशन थियेटर स्टेरिलाइजेशन और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की शत-प्रतिशत पालना करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संक्रमण की नियमित निगरानी के लिए ऑडिट तंत्र मजबूत करने और चिकित्सा कार्मिकों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग आयोजित करने को कहा गया है।
प्रत्येक मातृ मृत्यु की होगी विस्तृत समीक्षा
परिपत्र के अनुसार जिले में होने वाली हर मातृ मृत्यु का विस्तृत विश्लेषण करना और उसके कारणों को भारत सरकार के एमपीसीडीएसआर पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। इसके साथ ही मृत्यु के कारणों का विश्लेषण कर संबंधित चिकित्सा संस्थान, ब्लॉक और एएनएम को रिवर्स फीडबैक देना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मातृ मृत्यु के कारणों को केवल ‘अन्य कारण’ या ‘अस्पष्ट कारण’ के रूप में दर्ज करना स्वीकार्य नहीं होगा। अब प्रत्येक मामले में मृत्यु के वास्तविक और विशिष्ट कारणों का स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होगा, ताकि प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।
लेबर रूम सुदृढ़ीकरण पर भी जोर
स्वास्थ्य विभाग ने 14 मई 2026 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए सभी प्रसव कक्षों में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती और कार्यप्रणाली में सुधार की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मातृ मृत्यु कम करने के लिए विभाग की 5 प्राथमिकताएं
उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और ट्रैकिंग
गंभीर मामलों का त्वरित रेफरल और विशेषज्ञ उपचार
संक्रमण नियंत्रण, ओटी स्टेरिलाइजेशन और स्वच्छता व्यवस्था
प्रत्येक मातृ मृत्यु की अनिवार्य समीक्षा और पोर्टल पर रिपोर्टिंग
लेबर रूम में संसाधन, प्रशिक्षित स्टाफ और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की उपलब्धता