बिना सूचना प्रवेश रोकने पर भड़के व्यापारी, अफवाहों से बढ़ा विवाद; निगम बोला- मेला बंद नहीं, केवल वाहनों पर नियंत्रण
उदयपुर, 3 अगस्त: सावन के पहले सखी सोमवार मेले की शुरुआत सोमवार सुबह उस समय विवादों में घिर गई, जब नगर निगम ने ऐतिहासिक गुलाब बाग के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगाकर व्यापारियों और उनके वाहनों की आवाजाही रोक दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से व्यापारी भड़क उठे और मौके पर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शहर में यह अफवाह फैल गई कि इस बार सखी सोमवार मेले पर रोक लगा दी गई है, जिससे आमजन और व्यापारियों में असमंजस फैल गया।
जानकारी के अनुसार सुबह करीब नौ बजे नगर निगम के पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी के निर्देश पर मुख्य द्वार पर ताला लगाया गया और होमगार्ड तैनात किए गए। इसी दौरान मेले में दुकानें लगाने पहुंचे व्यापारियों को अंदर जाने से रोक दिया गया। मामला बढ़ने पर भाजपा शहर जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना से बात कर कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया।
विवाद बढ़ने के बाद निगम प्रशासन ने मुख्य द्वार का ताला खुलवा दिया। आयुक्त अभिषेक खन्ना ने स्पष्ट किया कि मेले पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उनका कहना था कि पार्क में अव्यवस्थित वाहन पार्किंग और गंदगी रोकने के लिए केवल वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया गया था। व्यापारियों को सामान उतारने के लिए वाहन अंदर ले जाने की अनुमति रहेगी, लेकिन बाद में उन्हें निर्धारित पार्किंग में खड़ा करना होगा। मेले के दौरान विशेष सफाई दल भी तैनात रहेगा।
हालांकि शहरवासियों ने सवाल उठाया कि यदि व्यवस्था में बदलाव करना था तो इसकी पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि हर वर्ष मेला इसी तरह आयोजित होता है, ऐसे में अचानक ताला लगाने से प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
रियासतकाल से जुड़ी है सखी सोमवार मेले की परंपरा
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी सहित अन्य नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सखी सोमवार मेला मेवाड़ की रियासतकालीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार को महिलाएं, परिवार और ग्रामीण बड़ी संख्या में गुलाब बाग पहुंचकर झूले, लोकगीत, मेलों और खरीदारी का आनंद लेते रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सफाई, यातायात या पार्किंग की समस्या है तो उसका समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि सदियों पुरानी लोक परंपरा को बाधित करना। नेताओं ने प्रशासन से मेले का सुव्यवस्थित संचालन करते हुए स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, पार्किंग और कानून-व्यवस्था की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।