राजस्थान विद्यापीठ में मूट कोर्ट का आयोजन

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विद्यार्थियों ने मेडिकल ग्रॉस नेग्लिजेन्स केस में पेश की न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावी झलक
उदयपुर, 10 अप्रैल:
राजस्थान विद्यापीठ के संघटक विधि संकाय में विधि शिक्षा को व्यवहारिक रूप देने के उद्देश्य से मूट कोर्ट का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने मेडिकल ग्रॉस नेग्लिजेन्स से जुड़े एक काल्पनिक मामले की सुनवाई प्रस्तुत कर न्यायालय की कार्यप्रणाली का जीवंत प्रदर्शन किया।
मेडिकल लापरवाही के केस पर सुनवाई
प्रस्तुत मामले में एक मरीज की अस्पताल में भर्ती के बाद उचित सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में हालत बिगड़ने और मृत्यु होने का पक्ष रखा गया। विद्यार्थियों ने वाद-विवाद, तर्क और साक्ष्यों के आधार पर केस को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। निर्णय में मूट कोर्ट के जजों ने अस्पताल प्रबंधन को “ग्रॉस नेग्लिजेन्स” का दोषी मानते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि संस्थान भी जिम्मेदार होता है। साथ ही अस्पतालों में योग्य स्टाफ, उपकरण और आपात सेवाओं की अनिवार्यता पर जोर दिया गया।
व्यवहारिक प्रशिक्षण से मजबूत होती विधि शिक्षा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि विधि शिक्षा को केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण से जोड़ना जरूरी है। मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, न्यायिक सोच और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करती हैं। प्राचार्य प्रो. कला मुणेत ने भी इसे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वकालत की शैली और न्यायिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जज, वकील, पुलिस व डॉक्टर की भूमिका निभाई, जिसे उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सराहा।