सरकारी बजट उपलब्ध होने के बावजूद विभागीय लापरवाही पर जताई नाराजगी
उदयपुर, 13 अक्टूबर: चार साल से लंबित वन विभाग की एक अनुग्रह अनुदान फाइल आखिरकार सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के हस्तक्षेप के बाद आगे बढ़ी है। यह मामला आदिवासी महिला बदनी मीणा का है, जिनके पति स्व. मनजी मीणा की राजकीय सेवा में रहते मृत्यु हो गई थी। नियमों के अनुसार परिवार को 20 लाख रुपए की अनुग्रह अनुदान राशि मिलनी थी, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
यह मामला सांसद रावत की जनसुनवाई में सामने आया, जहां बदनी मीणा ने अपनी पीड़ा बताई। सांसद ने इसे गंभीरता से लेते हुए उप वन संरक्षक उदयपुर को तत्काल सहायता दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोष में पर्याप्त बजट होने के बावजूद फाइल को लंबित रखना प्रशासनिक लापरवाही है और सरकार की नीति जनहित में तुरंत राहत देने की है।
सांसद के हस्तक्षेप के बाद उप वन संरक्षक ने संभागीय मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर बदनी मीणा की फाइल निपटाने का अनुरोध किया है। इसमें बताया गया कि अक्टूबर 2022 और फरवरी 2023 में बिल कोषालय शाखा को भेजा गया था, पर “पर्याप्त बजट नहीं” का हवाला देकर लौटा दिया गया। अब वर्ष 2025-26 में 20 लाख रुपए का बजट उपलब्ध है और फाइल को दोबारा भेजा गया है।