नगर निगम हर माह खर्च कर रहा लाखों, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
उदयपुर, 31 दिसम्बर: झीलों की नगरी उदयपुर की पहचान और लाइफ लाइन मानी जाने वाली पिछोला झील समेत उससे जुड़ी अन्य झीलें आज बदहाली का शिकार हैं। झीलों की नियमित सफाई के लिए नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर दो-दो डिवीडिंग मशीनें खरीदी गई हैं, लेकिन इसके बावजूद झीलों में जलीय खरपतवार, कचरा और गंदगी फैली हुई है। हालात यह हैं कि लाखों रुपए हर माह खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था जमीन पर असर नहीं दिखा पा रही है।
नगर निगम ने पिछोला झील, कुम्हारिया तालाब, स्वरूप सागर और रंग सागर की सफाई के लिए पहले करीब दो करोड़ रुपए की लागत से एक डिवीडिंग मशीन खरीदी थी। आवश्यकता पड़ने पर यह मशीन अजमेर की अनासागर झील की सफाई के लिए भी भेजी गई थी। बाद में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए निगम ने दो करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर एक और नई डिवीडिंग मशीन खरीदी। वर्तमान में दो-दो मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद झीलों में नियमित सफाई का अभाव साफ नजर आ रहा है।
झीलों की सफाई के लिए ठेका एजेंसी भी कार्यरत है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा बहुत कम मजदूर लगाए गए हैं। मजदूरों ने दो माह से मजदूरी नहीं मिलने की शिकायत भी की है। इससे सफाई कार्य प्रभावित हो रहा है।
सिर्फ वीआईपी और होटलों के आसपास ही सफाई
झील प्रेमियों का कहना है कि डिवीडिंग मशीनें उन्हीं स्थानों पर चलाई जाती हैं, जहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों या बड़े सितारा होटलों की आवाजाही रहती है। पिछोला झील के कई हिस्सों, विशेषकर नागा नगरी मस्जिद के पास, जलकुंभी, ऐल्गी और अन्य जलीय खरपतवार तेजी से फैल रही है। झील में गिरने वाले मल-मूत्र के नालों से इन खरपतवारों को पोषण मिल रहा है।
निगरानी पर सवाल
आरोप है कि निगम अधिकारियों की मशीन संचालन और ठेकेदार पर प्रभावी निगरानी नहीं है। इस संबंध में नगर निगम अधिकारी एस.एन. शर्मा का कहना है कि यदि ऐसा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी, हालांकि उनके अनुसार डिवीडिंग मशीनें झील में नियमित रूप से काम कर रही हैं।