मुख्य मार्ग से हटाया अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद; निगम ने दोबारा कब्जा करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी
उदयपुर, 12 अक्टूबर: उदयपुर के सूरजपोल क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई की। सोमवार को निगम के दस्ते ने वी-मार्ट के बाहर बने पक्के चबूतरे को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। यह निर्माण मुख्य मार्ग की जगह घेर रहा था, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायतें थीं।
दो दिन पहले भी निगम की टीम ने सूरजपोल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। उस दौरान वी-मार्ट के बाहर बनाचबूतरा हटने से रह गया था। सोमवार को निगम का दस्ता दोबारा मौके पर पहुंचा और चबूतरे को ध्वस्त कर दिया।
सूरजपोल शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां दिनभर बड़ी संख्या में वाहन और राहगीर गुजरते हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर मार्ग संकरा हो जाता है, जिससे यातायात प्रभावित होता है।
निगम की कार्रवाई के बाद इस हिस्से में सड़क की जगह बढ़ने से यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। आसपास के दुकानदारों और लोगों में कार्रवाई को लेकर हलचल रही।
दोबारा कब्जे पर कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। दोबारा सड़क या सार्वजनिक स्थान पर कब्जा करने पर सामान जब्त करने, जुर्माना लगाने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गोगुंदा में 17 हजार टन खनिज मिट्टी-पत्थर निकाल लिए, थाने में मामला दर्ज
उदयपुर, 12 अक्टूबर: उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र के खाखड़ी गांव में बिना अनुमति खनन करने का मामला सामने आया है। खान विभाग की जांच में मौके से करीब 15 हजार टन खनिज मिट्टी और 2 हजार टन खनिज पत्थर निकाले जाने का अनुमान सामने आया। विभाग ने जमीन मालिक और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ गोगुंदा थाने में मामला दर्ज कराया है। खनिज अभियंता दीपक सरपोटा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 7 अक्टूबर को ग्रामीणों से खाखड़ी गांव में अवैध खनन की शिकायत मिली थी। इसके बाद विभाग की टीम ने मौके पर जांच की। जांच में खनिज मिट्टी और पत्थर का खनन पाया गया। अधिकारियों ने मौके पर निकाली गई सामग्री की मात्रा का आकलन किया। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित जमीन नारायणलाल पालीवाल पुत्र मोहनलाल पालीवाल निवासी जसवंतगढ़ के नाम दर्ज है। विभाग के अनुसार मैसर्स विजय कुमार कॉन्ट्रेक्टर ने जमीन मालिकों की सहमति से वहां खनन किया। इसके लिए खान विभाग से वैध अनुमति नहीं ली गई थी।