चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता, पारदर्शिता और रोगी सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
उदयपुर, 13 मई: पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के फार्माकोलॉजी एवं फिजियोलॉजी विभाग की ओर से “गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। 11 और 12 मई को आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता, पारदर्शिता, रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण शोध पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. एम.एम. मंगल, विशिष्ट अतिथि डॉ. यू.एस. परिहार एवं डॉ. आर.के. पालीवाल उपस्थित रहे। पीएमसीएच चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव हैं। ऐसे आयोजन शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ते हैं।
पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. आशीष कक्कड़ ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान के राष्ट्रीय नैतिक दिशानिर्देशों पर जानकारी देते हुए मरीज की सूचित सहमति को क्लिनिकल ट्रायल की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया। एम्स नागपुर की डॉ. खुशबू बिष्ट ने सुरक्षा रिपोर्टिंग पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शोध के दौरान मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। वहीं एम्स कल्याणी के डॉ. अर्कपाल बंद्योपाध्याय ने औषधि विकास और क्लिनिकल परीक्षण की आधुनिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
डॉ. रोहिताश यादव ने शोध प्रकाशन में पारदर्शिता, नैतिक मूल्यों और डेटा सुरक्षा के महत्व पर चर्चा की। कार्यशाला में करीब 300 विद्यार्थियों, रेजिडेंट चिकित्सकों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया। आयोजन अध्यक्ष डॉ. विनोदीनी वरहाडे ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सा अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।