उदयपुर जैसे जिलों में साझा स्किलिंग हब की जरूरत

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डॉ. अनिल मेहता बोले- हर कॉलेज में महंगी लैब जरूरी नहीं, हर विद्यार्थी की आधुनिक स्किल लैब तक पहुंच जरूरी
उदयपुर, 26 अगस्त
: नीति आयोग की अगस्त में जारी रिपोर्ट ‘री-इमैजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047’ ने देश की स्किलिंग व्यवस्था को प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, कौशल, अप्रेंटिसशिप, रोजगार और आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया है। विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर जैसे जिलों में इसके लिए जिला स्तरीय साझा स्किलिंग हब विकसित करना उपयोगी होगा। इसमें आईटीआई, पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, विश्वविद्यालय, निजी संस्थान और उद्योगों की आधुनिक प्रयोगशालाओं व वर्कशॉप को साझा नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।
डॉ. मेहता के अनुसार हर संस्थान में महंगी सीएनसी, रोबोटिक्स, ईवी, ऑटोमेशन या एआई लैब बनाने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर विद्यार्थी को जरूरत के अनुसार ऐसी सुविधाओं तक पहुंच मिले। इससे छोटे कॉलेज और ट्रस्ट संचालित संस्थानों पर भारी निवेश का दबाव भी कम होगा।
डिग्री के साथ कौशल और अप्रेंटिसशिप जरूरी
उन्होंने कहा कि बीए, बीकॉम और बीएससी जैसी डिग्रियों को स्थानीय रोजगार जरूरतों से जोड़ा जाना चाहिए। बीकॉम के साथ डिजिटल मार्केटिंग व एनालिटिक्स, बीएससी के साथ डेटा एनालिटिक्स और बीए के साथ पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी जैसे कौशल जोड़े जा सकते हैं। इंजीनियरिंग शिक्षा में ईवी, सौर ऊर्जा, सीएनसी और ऑटोमेशन पर जोर दिया जा सकता है।
डॉ. मेहता ने बताया कि उदयपुर में करीब छह वर्ष पहले स्थापित सरस्वती मेकेट्रोनिक्स सेंटर साझा स्किलिंग और उद्योग आधारित प्रशिक्षण का उदाहरण है, जहां सीएनसी, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और मेकेट्रोनिक्स की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
स्कूल से शुरू हो स्किलिंग
उन्होंने कहा कि स्किलिंग कॉलेज से नहीं, स्कूल से शुरू होनी चाहिए। कक्षा 6 से 12 तक संचार, डिजिटल ज्ञान, वित्तीय साक्षरता, समस्या समाधान और उद्यमिता जैसे कौशल विकसित किए जाएं। उदयपुर में उद्योगों की भविष्य की जरूरतों के आधार पर डिस्ट्रिक्ट स्किल डिमांड मैपिंग कर प्रशिक्षण संस्थानों को उससे जोड़ा जाना चाहिए। उनके अनुसार स्किलिंग की सफलता का पैमाना केवल कितने युवाओं को प्रशिक्षण मिला नहीं, बल्कि कितनों को रोजगार, बेहतर आय और आगे बढ़ने के अवसर मिले—यह होना चाहिए। लक्ष्य ‘ट्रेनिंग इंडिया’ से ‘लर्निंग-टू-अर्निंग इंडिया’ की ओर बढ़ना होना चाहिए।