एमबी अस्पताल की शाम्भवी लैब की एफआईआर में नया विवाद

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भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले पूर्व महापौर चंद्रसिंह कोठारी को ही बनाया परिवादी, बोले- पुलिस ने मुझसे संपर्क तक नहीं किया
उदयपुर, 10 सितंबर:
एमबी अस्पताल में सेवाएं दे रही शाम्भवी डायग्नोस्टिक लैब से जुड़े मामले में हाथीपोल थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर नया विवाद सामने आया है। मामले में उदयपुर के पूर्व महापौर चंद्रसिंह कोठारी को ही परिवादी बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कोठारी का कहना है कि उन्होंने जिला कलेक्टर को लैब से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने पुलिस अधीक्षक को अपने नाम से एफआईआर दर्ज करने के लिए कोई शिकायत नहीं दी थी और न ही पुलिस ने एफआईआर में उन्हें परिवादी बनाए जाने की जानकारी दी।
मामले की शुरुआत पूर्व महापौर कोठारी की जिला कलेक्टर को दी गई शिकायत से हुई थी। कलेक्टर के आदेश पर प्रशासनिक जांच कमेटी गठित की गई। जांच में लैब संचालन को लेकर कई अनियमितताएं सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हाथीपोल थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
जांच रिपोर्ट में उठे कई सवाल
प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के अनुसार एमबी अस्पताल में लैब सेवाओं के लिए एनएबीएल प्रमाण-पत्र की आवश्यकता थी। रिपोर्ट में 19 अगस्त 2023 से 8 सितंबर 2024 तक शाम्भवी लैब के पास लखनऊ का एनएबीएल प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं पाए जाने का उल्लेख है। वहीं उदयपुर में संचालित लैब का नैदानिक स्थापना अधिनियम, 2010 के तहत पंजीकरण भी नहीं होने की बात सामने आई।
जांच समिति ने उदयपुर से सैंपल लखनऊ भेजे जाने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध होने को लेकर भी सवाल उठाए। समिति ने इसके भुगतान सहित पूरे मामले की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई। इसके अलावा सितंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच लैब को भेजी जाने वाली जांचों की संख्या में अचानक हुई वृद्धि भी जांच का विषय बनी।
व्हिसलब्लोअर को परिवादी बनाने पर सवाल
पूर्व महापौर कोठारी का कहना है कि उन्होंने अनियमितताओं को सामने लाने के उद्देश्य से शिकायत की थी। ऐसे में एफआईआर में उन्हें ही परिवादी बनाए जाने से वे हैरान हैं। मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत करने वाले व्यक्ति को ही पुलिस मामले में परिवादी बना देगी, तो भविष्य में सरकारी संस्थानों में गड़बड़ियों को सामने लाने वाले लोग शिकायत करने से हिचक सकते हैं।