मॉर्निंग वॉक में ग्रामीणों से सीधा संवाद, डेयरी, खेल मैदान, कुआं और जल निकासी के फैसलों ने जगाई उम्मीद
उदयपुर, 2 अगस्त: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का झाड़ोल तहसील के आदिवासी बहुल बीड़ा गांव में रात्रि प्रवास केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि ग्रामीणों के लिए विकास की नई शुरुआत बन गया। शनिवार रात आयोजित ग्राम विकास चौपाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने कई मांगों पर तत्काल घोषणाएं कीं और रविवार सुबह गांव की गलियों में पैदल भ्रमण कर इन घोषणाओं को जमीनी भरोसे से जोड़ दिया।
सुबह मुख्यमंत्री बिना औपचारिकता के गांव की गलियों में पहुंचे। बच्चों से पढ़ाई और भविष्य के सपनों पर बात की, उन्हें चॉकलेट बांटी, बुजुर्गों का हालचाल जाना और महिलाओं से स्वयं सहायता समूहों तथा आजीविका योजनाओं की जानकारी ली। किसानों से खेती, प्राकृतिक कृषि और पशुपालन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे किसान भी मेहनत से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गांव में डेयरी नहीं होने से दूध बेचने के लिए दूर जाना पड़ता है। इस पर रात्रि चौपाल में ही सरस डेयरी केंद्र की घोषणा की गई, जिसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। इसके अलावा कुएं के निर्माण, खेल मैदान और जल निकासी व्यवस्था को भी स्वीकृति मिलने से ग्रामीणों में उत्साह दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “गांव की समृद्धि ही देश की समृद्धि और विकसित राजस्थान की नींव है।” उन्होंने बताया कि ग्राम विकास चौपाल का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि मौके पर समाधान सुनिश्चित करना है। प्रशासन को निर्देश दिए गए कि बीड़ा गांव में आधारभूत सुविधाओं के विकास में किसी प्रकार की देरी नहीं हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजीविका योजना से महिलाओं की आय बढ़ी है और पशुपालकों व किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता अपनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और आपसी सौहार्द बनाए रखने का आह्वान किया।
प्रातः भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री आवरा माता मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
बीड़ा गांव में पहली बार रुका कोई मुख्यमंत्री
ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने रात गांव में बिताकर सुबह उनके घर-द्वार तक पहुंचकर समस्याएं सुनीं और तत्काल निर्णय लिए। यही कारण रहा कि बीड़ा गांव में मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “जनसंवाद से जनकल्याण” का उदाहरण बनकर सामने आया।