पारस अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में नशे की पहचान और रोकथाम पर दिया प्रशिक्षण
उदयपुर, 10 जून: वरिष्ठ चिकित्सक एवं नशा मुक्ति अभियान से लंबे समय से जुड़े डॉ. पी.सी. जैन ने कहा कि नर्सें मरीजों के सबसे अधिक संपर्क में रहती हैं, इसलिए नशे की पहचान और नशा मुक्ति के लिए प्रेरित करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मरीज और नर्स के बीच भावनात्मक जुड़ाव होने के कारण नर्सें नशे की प्रारंभिक अवस्था को पहचानकर समय रहते उचित परामर्श दे सकती हैं।
पारस अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. जैन ने नर्सिंग स्टाफ को विभिन्न प्रकार के नशों के शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशा छोड़ने से जुड़ी तीन प्रमुख आशंकाएं—विड्रॉल लक्षणों का डर, उपचार प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता और समाज में जानकारी फैलने की चिंता—अक्सर मरीजों को उपचार से दूर रखती हैं। नर्सें मरीजों से भावनात्मक संवाद स्थापित कर इन भय को दूर करने और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती नशे की समस्या की रोकथाम में नर्सिंग समुदाय महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। कार्यक्रम का संचालन सत्यनारायण मेनारिया ने किया, जबकि डॉ. वैशाली बोदल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन नशा मुक्ति संदेश पर आधारित गीत एवं नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें पूजा नागदा, प्रिंस कलाल, वली उल्लाह अहमद, अनीता कटल और दिया क्षेत्री ने भाग लिया।