जल संकट में पुराने जलस्रोतों की याद आई, 24 बावड़ियों का पानी उपयोग योग्य; 48 की जगह 72 घंटे में जलापूर्ति से बढ़ी परेशानी
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 25 सितम्बर : झीलों की नगरी उदयपुर में कमजोर मानसून के कारण पेयजल संकट गहराने लगा है। ऐसे में शहर के पुराने जलस्रोत एक बार फिर उम्मीद का सहारा बनकर सामने आए हैं। शहर में कभी 125 से अधिक बावड़ियां और कुएं जलस्रोत के रूप में मौजूद थे, लेकिन अब इनमें करीब 50 ही अस्तित्व में हैं। इनमें भी करीब 30 बावड़ियां ऐसी हैं, जिनसे पेयजल की उम्मीद की जा रही है, जबकि 24 बावड़ियों के पानी का उपयोग किया जा सकता है। यानी सवा सौ से अधिक पुराने जलस्रोतों में अब महज करीब 30 ही संकट के समय शहर के काम आने की स्थिति में हैं। जल संकट ने इन बावड़ियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
कम बारिश के चलते जलदाय विभाग ने उदयपुर शहर में पेयजल आपूर्ति का अंतराल 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया है। विभाग के अनुसार पिछोला, फतहसागर सहित प्रमुख जलस्रोतों में अपेक्षित पानी नहीं पहुंचने के कारण उपलब्ध जल का सावधानी से उपयोग करना जरूरी हो गया है। हालांकि, शहरवासियों ने 72 घंटे के अंतराल को अनुचित बताते हुए 48 घंटे की व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई है।
बड़ी झील से पानी लेने की तैयारी
वैकल्पिक जलस्रोत के रूप में अब बड़ी झील को भी उपयोग में लेने की तैयारी है। अब तक यहां से नाममात्र पानी लिया जाता रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर नीमचखेड़ा, फतेहपुरा और आसपास के इलाकों में जलापूर्ति के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। खरबड़िया माइंस क्षेत्र में ट्यूबवेल खोदने तथा लखावली माइंस और अन्य तालाबों में पानी की उपलब्धता जांचने की भी तैयारी है।
दो साल पहले उठी थी बावड़ियों के संरक्षण की आवाज
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने करीब दो वर्ष पहले लोकसभा में उदयपुर की बावड़ियों के संरक्षण और उन्हें जलस्रोत के रूप में विकसित करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने इन्हें जल जीवन मिशन से जोड़ने की मांग भी की थी। वर्तमान जल संकट में इन पुराने जलस्रोतों की उपयोगिता एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
कांग्रेस का विरोध, कहा—हर दिन मिलना चाहिए पानी
72 घंटे की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर शहर में विरोध शुरू हो गया है। उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर निर्णय वापस लेने, 48 घंटे की व्यवस्था बहाल करने तथा नियमित 24 घंटे के अंतराल में पानी उपलब्ध कराने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि 72 घंटे का अंतराल मध्यम व निम्न आय वर्ग, किराएदारों, महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी बढ़ाएगा।