मुफ्त उपचार की जगह जमा कराए हजारों रुपए, एक नहीं, कई शिकायतें मिली, प्रशासन ने तुरंत राशि लौटाने के दिए निर्देश
उदयपुर, 25 जून: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत कैशलेस उपचार देने के लिए अधिकृत निजी पारस हॉस्पिटल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। योजना के लाभार्थी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स से उपचार के नाम पर राशि वसूलने की सात शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद मामला गंभीर हो गया। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को पहले नकद राशि जमा कराने के लिए मजबूर किया और बाद में पैसा वापस मिलने का आश्वासन दिया। कई मरीजों के परिजन उपचार की तत्काल आवश्यकता के चलते रकम जमा कराने को विवश हो गए।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई
मामले की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंचने पर प्रशासन ने अस्पताल प्रतिनिधियों को तलब कर जवाब मांगा। जांच में प्रथम दृष्टया आरजीएचएस नियमों की अवहेलना सामने आने पर अस्पताल को कड़ी फटकार लगाई गई तथा मरीजों से ली गई राशि लौटाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आरजीएचएस के पात्र लाभार्थियों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी है।
इलाज के लिए पहले मांगी गई रकम
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल स्टाफ ने भर्ती के समय कहा कि पहले राशि जमा करानी होगी, बाद में उसे वापस ले सकेंगे। गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों के परिजनों के पास तत्काल भुगतान के अलावा कोई विकल्प नहीं था। कुछ मामलों में उपचार में देरी और लापरवाही के आरोप भी लगाए गए हैं।
दोबारा शिकायत पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने कहा कि आरजीएचएस से संबद्ध कोई भी अस्पताल पात्र मरीज को उपचार देने से इनकार नहीं कर सकता। नियमों के उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर अस्पताल के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, यहां तक कि पंजीकरण और अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। प्रशासन अब शिकायतों की विस्तृत जांच कर रहा है और पात्र मरीजों को उनकी जमा राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।