₹2,000 की ‘लक्ष्मण रेखा’ पर भड़के पेंशनर्स, RGHS का प्री-ऑथराइजेशन आदेश वापस लेने की मांग

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राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने कहा- बीमारी अनुमति लेकर नहीं आती, आदेश नहीं हटाया तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन
उदयपुर, 12 जुलाई:
राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने RGHS के तहत 13 जुलाई से ₹2,000 से अधिक की ओपीडी जांचों के लिए लागू की जा रही प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था का कड़ा विरोध किया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी और प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल ने कहा कि बीमारी ₹2,000 की सीमा देखकर नहीं आती और न ही चिकित्सक जांच की लागत देखकर उसे लिखता है। डॉक्टर द्वारा आवश्यक बताई गई जांच के लिए टीपीए की मंजूरी का इंतजार कराना बुजुर्ग पेंशनर्स के साथ अन्याय है। उन्होंने इसे RGHS की कैशलेस एवं सुगम चिकित्सा व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत बताते हुए ‘तुगलकी आदेश’ करार दिया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार को अनावश्यक जांचों या फर्जी बिलिंग की आशंका है तो संदिग्ध अस्पतालों और जांच केंद्रों का ऑडिट कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को परेशान नहीं किया जाए। संगठन मंत्री इंजी. सुरेंद्र भूषण सहाय ने चेतावनी दी कि आदेश वापस नहीं होने पर प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स से विचार-विमर्श कर लोकतांत्रिक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।