पूर्व कुलपति सारंगदेवत पर फर्जी नियुक्तियों और बिना रिकॉर्ड करोड़ों रुपए बांटने के आरोप, खुद पर लगे आरोपों को बताया निराधार
उदयपुर, 19 सितम्बर: जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को प्रेस वार्ता में कुल प्रमुखंवरलाल गुर्जर ने दावा किया कि विश्वविद्यालय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और अगले माह कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने मौजूदा वित्तीय स्थिति के लिए पूर्व कुलपति एसएस सारंगदेवत के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों रुपए बिना रिकॉर्ड बांटने का आरोप
गुर्जर ने आरोप लगाया कि पूर्व कुलपति के कार्यकाल में फर्जी नियुक्तियां की गईं तथा बिना रिकॉर्ड दर्ज किए कर्मचारियों को करोड़ों रुपए उधार के रूप में बांटे गए। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है, जो वित्तीय अनियमितताओं और नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
चार करोड़ रुपए बांटने का हिसाब नहीं
कुल प्रमुख ने कहा कि करीब छह माह पहले पद संभालने के बाद वित्तीय स्थिति की जानकारी सामने आई। प्राथमिक जांच में करीब चार करोड़ रुपए कर्मचारियों में बांटे जाने की बात सामने आई, लेकिन राशि किस आधार पर दी गई, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई कर्मचारी बिना काम किए घर बैठे वेतन ले रहे थे। ऐसे कर्मचारियों से नियमानुसार राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुलपति ने कहा- 36 करोड़ के फंड की दी गई थी जानकारी
कुलपति मंजू मांडोत ने कहा कि पूर्व कुलपति की अंतिम बैठक में विश्वविद्यालय के पास 36 करोड़ रुपए का फंड होने की जानकारी दी गई थी। बाद में जांच में 19 करोड़ रुपए का लोन सामने आया और करीब 17 करोड़ रुपए कॉर्पस फंड में होना बताया गया। उनके अनुसार विश्वविद्यालय का कुल फंड करीब 25 करोड़ रुपए होना चाहिए था।
तीन पद रखने के आरोपों को नकारा
गुर्जर ने अपने ऊपर तीन पद रखने के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कुल प्रमुख ही कुलाधिपति होता है। पुत्र प्रवीण गुर्जर को लेकर उन्होंने कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं और समितियों द्वारा नियमानुसार उनका चयन किया गया है।
पूर्व कुलपति को बचाने के लिए दबाव का आरोप
गुर्जर ने आरोप लगाया कि पूर्व कुलपति सारंगदेवत को बचाने और विश्वविद्यालय में बनाए रखने के लिए उन पर राजनीतिक एवं अन्य स्तरों से दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं में ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीना और भाजपा जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़ सहित कांग्रेस नेताओं की ओर से भी फोन आए। साथ ही कुछ संगठनों पर डराने-धमकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।