20 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल, 40 हजार लीटर दैनिक जल खपत या 100 किलो प्रतिदिन कचरा पैदा करने वाली इकाइयां दायरे में
उदयपुर, 28 अक्टूबर: उदयपुर जिले में बड़े संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय परिसरों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 की पालना के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। पात्र इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर 31 अक्टूबर तक पंजीकरण कराना होगा। निगरानी के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी विनय कट्टा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इन मानकों पर तय होगी पात्रता
नियमों के अनुसार 20 हजार वर्ग मीटर या अधिक कुल फ्लोर एरिया, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक जल उपभोग अथवा प्रतिदिन 100 किलो या अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाली इकाइयां इस श्रेणी में आएंगी। इनमें सरकारी विभाग, विश्वविद्यालय, स्कूल-कॉलेज, होटल, अस्पताल, मॉल, औद्योगिक इकाइयां, विवाह स्थल, रेस्तरां, थोक मंडियां और बड़े आवासीय परिसर शामिल हैं।
कचरे का पृथक्करण और प्रसंस्करण जरूरी
नोडल अधिकारी विनय कट्टा के अनुसार, पंजीकरण के बाद संबंधित इकाइयों को कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण करना होगा। गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। गीले कचरे का परिसर में वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करना होगा। जहां यह संभव नहीं है, वहां निर्धारित नियमों के अनुसार स्थानीय निकाय से आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।