झील संवाद में विशेषज्ञों ने जताई चिंता, कहा—कंक्रीटीकरण से बढ़ रहा तापमान
उदयपुर, 26 अप्रैल: उदयपुर में बढ़ते पर्यटन और तेज़ी से हो रहे कंक्रीटीकरण के कारण प्राकृतिक कूलिंग क्षेत्र लगातार घट रहे हैं, जिससे शहर का तापमान बढ़ता जा रहा है। यह चिंता रविवार को आयोजित झील संवाद में विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने व्यक्त की।
विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि शहर में मिट्टी और कच्ची जमीन लगभग समाप्त हो चुकी है। डामर और कंक्रीट सूर्य की गर्मी को अवशोषित कर लंबे समय तक बनाए रखते हैं, जिससे सतह और आसपास का तापमान बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अरावली की पहाड़ियां रेगिस्तान के विस्तार को रोकती रही हैं, लेकिन उनका लगातार कटाव हो रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
डॉ. मेहता ने संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि बड़े बॉटैनिकल गार्डन, झीलें और हरित क्षेत्र शहर का तापमान पांच डिग्री तक कम कर सकते हैं। सड़क किनारे पेड़ और घरों में हरियाली भी चार डिग्री तक तापमान घटाने में सहायक हैं।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि पर्यटक वाहनों की बढ़ती संख्या, होटलों में लगातार चल रहे एसी और हरित क्षेत्रों की कमी से शहर “हीट ट्रैप” बनता जा रहा है। इसका असर पशु-पक्षियों और आमजन पर भी पड़ रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि छोटे तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते रिसॉर्ट निर्माण से भी तापमान बढ़ रहा है। उन्होंने लेक सिटी और गार्डन सिटी की पहचान बनाए रखने के लिए जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर दिया। संवाद से पहले बारी घाट पर स्वच्छता श्रमदान भी किया गया।