अरावली में महकेगा चंदन, तीन जिलों में बनेंगे ‘चंदन वन’

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उदयपुर, 19 अप्रैल (संदीप कुमावत): राजस्थान के अरावली अंचल के जंगल अब जल्द ही चंदन की खुशबू से महकेंगे। राज्य सरकार ने उदयपुर, बांसवाड़ा और सिरोही के संरक्षित वन क्षेत्रों में ‘चंदन वन’ विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है। वन विभाग ने उपयुक्त स्थलों का चयन शुरू कर दिया है और मानसून से पहले फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं। यह पहल प्रदेश के हरित राजस्थान अभियान को नई गति देने वाली साबित होगी।
‘पौधरोपण महाअभियान’ के तहत आगामी मानसून 2026 में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उदयपुर के बांकी वनखंड, कालिका माता नर्सरी और चीरवा घाटी, सिरोही के माउंट आबू क्षेत्र तथा बांसवाड़ा के आर्द्र वन क्षेत्र चंदन रोपण के लिए सबसे उपयुक्त माने गए हैं। लाल दोमट मिट्टी, बेहतर जल निकासी और अनुकूल जलवायु के कारण यहां भारतीय चंदन के विकास की संभावनाएं अधिक हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून से पौधरोपण अभियान की शुरुआत होगी, जबकि जुलाई से सितंबर तक जनभागीदारी के साथ व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि यह अभियान न केवल अरावली की जैव विविधता को समृद्ध करेगा, बल्कि राजस्थान को पर्यावरणीय रूप से अधिक सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दो साल में लगे 19 करोड़ पौधे
बीते दो वर्षों में प्रदेश में लगभग 19 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है। वन एवं पर्यावरण विभाग राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘नमो नर्सरी’ तथा पंचायत समिति स्तर पर ‘नमो वन’ विकसित करेगा। किसानों को निःशुल्क फलदार पौधे दिए जाएंगे और ड्रोन सीडिंग व जियो टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी किया जाएगा।