शरद पूर्णिमा आज : 30 साल बाद दुर्लभ संयोग, तीन शुभ योगों में होगी मां लक्ष्मी की आराधना

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जगदीश मंदिर में ठाकुरजी का धवल जरी से श्रृंगार, 501 लीटर दूध की खीर का लगेगा भोग
उदयपुर, 24 अक्टूबर
: शरद पूर्णिमा पर इस बार विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और गजकेसरी योग का संयोग बन रहा है। इसे पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की आराधना के साथ चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी।
दो दिन रहेगी पूर्णिमा तिथि
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:35 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। 25 अक्टूबर की शाम प्रदोष काल और रात निशीथ काल में पूर्णिमा तिथि होने से इस रात लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व रहेगा। वहीं, 26 अक्टूबर की सुबह स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ किए जाएंगे।
जगदीश मंदिर में 501 लीटर खीर का भोग
शरद पूर्णिमा पर उदयपुर के जगदीश मंदिर में ठाकुरजी का धवल जरी के वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को 501 लीटर दूध से तैयार खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया जाएगा।
चांदनी में खीर रखने की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के चलते दूध और चावल से बनी खीर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे। अगले दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना भी शुभ माना गया है।