बिचौलिया बनकर दिलवाई थी फर्जी एमए डिग्री, 15 आरोपी गिरफ्तार; पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही जांच एजेंसी
चित्तौड़गढ़, 16 जुलाई: राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की वर्ष 2022 हिंदी लेक्चरर भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी एमए (हिंदी) की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप है। मामले में अब तक फर्जी डिग्री का उपयोग करने वाली अभ्यर्थी समेत कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी द्वारा प्रस्तुत एमए (हिंदी) की डिग्री का सत्यापन कराने पर पता चला कि वह मेवाड़ यूनिवर्सिटी द्वारा जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया।
जांच में सामने आया कि अशोक विश्नोई ने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क कर उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए फर्जी डिग्री और अंकतालिका की व्यवस्था करवाई। आरोप है कि उसने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर एसओजी ने उसे 14 जुलाई को गिरफ्तार किया। अदालत ने आरोपी को 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा है, जहां उससे रैकेट के अन्य सदस्यों और फर्जी डिग्रियों के नेटवर्क को लेकर पूछताछ की जा रही है।
एसओजी के अनुसार अशोक विश्नोई के खिलाफ फर्जी डिग्री दिलाने से जुड़े अन्य मामले भी दर्ज हैं और वह पहले भी एक प्रकरण में गिरफ्तार हो चुका है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट के जरिए कितने अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही।