दो दशक पुराने चर्चित मामले में अपील खारिज, सीबीआई अदालत के फैसले को बरकरार रखा
उदयपुर, 7 मई: देश के सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले सोहराबुद्दीन शेख एवं तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए उसके खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ करीब दो दशक से सुर्खियों में रहे इस बहुचर्चित मामले में आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।
मुख्य न्यायाधीश अलोक अराधे और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की खंडपीठ ने सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
2005-06 की घटनाओं से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2005 में गुजरात और राजस्थान पुलिस द्वारा सोहराबुद्दीन शेख के कथित एनकाउंटर तथा बाद में उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की संदिग्ध मौत से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि इन मुठभेड़ों को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया था।
सीबीआई जांच के बाद गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के 21 पुलिस अधिकारियों सहित कुल 22 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हालांकि दिसंबर 2018 में विशेष सीबीआई अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव और कई गवाहों के hostile हो जाने का हवाला देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
सीबीआई ने भी नहीं दी चुनौती
सोहराबुद्दीन के परिजनों ने 2019 में हाईकोर्ट में अपील दायर कर विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान सीबीआई ने स्पष्ट कर दिया था कि वह ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देगी और उसने निचली अदालत के निर्णय को स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले को कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक देश की राजनीति और न्यायिक गलियारों में चर्चा का केंद्र रहे इस मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है।