दो बीघा जमीन बेच बेटियों के सपनों को दी उड़ान

Share

भीलवाड़ा की संध्या बिश्नोई ने अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता रजत पदक, पिता बोले— बेटी ने मिट्टी को चांदी में बदल दिया
भीलवाड़ा, 6 अगस्त:
आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियों के सपनों को पंख देने वाले एक पिता की मेहनत आज विश्व पटल पर चमक रही है। राजस्थान के भीलवाड़ा की 16 वर्षीय पहलवान संध्या बिश्नोई ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 46 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता के पीछे पिता निर्मल बिश्नोई का संघर्ष है, जिन्होंने बेटियों की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए अपनी दो बीघा जमीन तक बेच दी।
भीलवाड़ा लौटने पर संध्या ने बताया कि वह चार वर्ष की उम्र से अखाड़े में अभ्यास कर रही हैं। बचपन में लड़कों के साथ कुश्ती लड़ते हुए उनका आत्मविश्वास बढ़ा। विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने पोलैंड और रूस की पहलवानों को 10-0 से हराया, जबकि सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की खिलाड़ी को महज 30 सेकेंड में चित्त कर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल से पहले कान और कलाई में चोट लगने के बावजूद उन्होंने मुकाबला लड़ा और रजत पदक जीता।
फैक्ट्री मजदूर पिता निर्मल बिश्नोई ने कहा कि उनकी चारों बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। बड़ी बेटी गीतिका और छोटी बेटी सिद्धि भी राष्ट्रीय स्तर की पहलवान हैं। संध्या के कोच कल्याण मल का कहना है कि वह बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी हैं और भविष्य में ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का माद्दा रखती हैं।